भारत का संविधान (Constitution of India) दुनिया का सबसे बड़ा, विस्तृत और जीवंत लिखित दस्तावेज (Living Document) है। यह केवल नियमों और कानूनों की एक संग्रह-पुस्तिका नहीं है, बल्कि स्वतंत्र भारत की आत्मा, लोकतांत्रिक मूल्यों, और नागरिकों के अधिकारों का मूलभूत आधार है।
किसी भी लोकतांत्रिक देश की शासन व्यवस्था कैसे चलेगी, सरकार के विभिन्न अंगों—विधायिका (Legislature), कार्यपालिका (Executive), और न्यायपालिका (Judiciary)—की क्या सीमाएं होंगी, और नागरिकों को क्या अधिकार मिलेंगे, यह सब संविधान द्वारा ही तय किया जाता है।
यह अध्याय भारतीय संविधान की नींव, उसकी परिभाषा, अर्थ, आवश्यकता, प्रमुख विशेषताओं, और इसके निर्माण के स्रोतों को इस गहराई से समझाता है कि आपको इस विषय पर किसी अन्य पुस्तक को पढ़ने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
1. Definition of Constitution (संविधान की परिभाषा)
सरल शब्दों में:
संविधान किसी भी राष्ट्र का मूलभूत कानून (Supreme Law of the Land) होता है। यह वह प्राथमिक कानूनी ढांचा है जिसके आधार पर किसी देश की सरकार का गठन होता है और उसकी शक्ति तथा सीमाओं का निर्धारण किया जाता है।
संवैधानिक विचारकों के अनुसार:
“संविधान उन बुनियादी सिद्धांतों और नियमों का समुच्चय (Set of Rules) है, जो राज्य के विभिन्न अंगों के बीच संबंधों को और राज्य तथा उसके नागरिकों के बीच के संबंधों को संचालित करता है। यह सरकार की शक्तियों को सीमित करता है ताकि तानाशाही की संभावना न रहे।”
मुख्य बिंदु:
- सर्वोच्चता (Supremacy): देश का कोई भी कानून, अध्यादेश, या सरकारी आदेश संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं कर सकता। यदि कोई कानून संविधान के विरुद्ध होता है, तो न्यायपालिका उसे शून्य (Null and Void) घोषित कर सकती है।
- शक्तियों का वितरण: संविधान सरकार के तीनों प्रमुख अंगों—विधायिका (कानून बनाने वाली), कार्यपालिका (कानून लागू करने वाली), और न्यायपालिका (कानून की व्याख्या करने वाली)—के बीच शक्तियों का स्पष्ट बंटवारा करता है।
2. Meaning & Core Concept (संविधान का अर्थ और मूल अवधारणा)
“संविधान” शब्द हिंदी के दो शब्दों से मिलकर बना है: ‘सम’ + ‘विधान’, जिसका अर्थ है “समान नियम या कानून”। यह एक ऐसा ढांचा प्रस्तुत करता है जो समाज के सभी वर्गों, धर्मों, और जातियों पर समान रूप से लागू होता है।
लिखित बनाम अलिखित संविधान (Written vs. Unwritten Constitution)
दुनिया में दो प्रकार के संविधान पाए जाते हैं:
| आधार | लिखित संविधान (Written) | अलिखित संविधान (Unwritten) |
| परिभाषा | एक एकल दस्तावेज में क्रमबद्ध रूप से संकलित। | परंपराओं, निर्णयों, और समय-समय पर बने कानूनों पर आधारित। |
| उदाहरण | भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)। | ब्रिटेन (United Kingdom), न्यूजीलैंड। |
| संविधान की स्थिति | संविधान संसद से सर्वोच्च होता है। | संसद संविधान से सर्वोच्च होती है (Parliamentary Supremacy)। |
| लचीलापन | आमतौर पर कठोर या आंशिक रूप से लचीला। | अत्यधिक लचीला (आसानी से बदला जा सकता है)। |
भारत का संविधान लिखित (Written) है और यह विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है।
3. Need & Significance of a Constitution (संविधान की आवश्यकता क्यों है?)
अगर किसी देश में संविधान न हो, तो वहां ‘जिसकी लाठी, उसकी भैंस’ (Rule of Might) वाली स्थिति पैदा हो जाएगी। संविधान की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से होती है:
1. समाज में समन्वय और विश्वास बनाना
भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में जहां अनेक धर्मों, भाषाओं, और संस्कृतियों के लोग रहते हैं, संविधान बुनियादी नियमों का एक ऐसा ढांचा देता है जिससे सभी नागरिक सुरक्षा और समानता महसूस करते हैं।
2. सरकार की शक्तियों को सीमित करना (Limiting Government Powers)
संविधान सरकार को यह बताने के साथ-साथ कि वह क्या कर सकती है, यह भी तय करता है कि वह क्या नहीं कर सकती। यह नागरिकों को मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) प्रदान करके सरकार को निरंकुश (Arbitrary) होने से रोकता है।
3. अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा
संविधान यह सुनिश्चित करता है कि बहुसंख्यक समुदाय (Majority) अपनी इच्छाओं को अल्पसंख्यकों (Minorities) पर जबरन न थोपे।
4. न्यायपूर्ण समाज की स्थापना
संविधान का उद्देश्य केवल शासन चलाना नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय प्रदान करना है (जैसा कि प्रस्तावना में उल्लेखित है)।
4. Conceptual Glossary (मुख्य संवैधानिक शब्दावली)
संवैधानिक अध्ययन को गहराई से समझने के लिए इन पारिभाषिक शब्दों का अर्थ जानना अनिवार्य है:
- संवैधानिकता / संविधानवाद (Constitutionalism): यह विचार कि सरकार की शक्तियां संविधान द्वारा सीमित होनी चाहिए। यह “कानून के शासन” पर बल देता है, न कि “व्यक्ति के शासन” पर।
- कानून का शासन (Rule of Law): इसका तात्पर्य है कि कानून के समक्ष सभी नागरिक समान हैं। कोई भी व्यक्ति, चाहे वह देश का राष्ट्रपति हो या आम नागरिक, कानून से ऊपर नहीं है।
- संप्रभुता (Sovereignty): भारत अपने आंतरिक और बाह्य मामलों में निर्णय लेने के लिए पूर्णतः स्वतंत्र है। इस पर किसी विदेशी ताकत का नियंत्रण नहीं है।
- गणराज्य (Republic): जिस देश का राष्ट्राध्यक्ष (जैसे भारत में राष्ट्रपति) वंशानुगत (Hereditary) न होकर जनता द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चुना जाता है।
- पंथनिरपेक्षता (Secularism): राज्य का अपना कोई आधिकारिक धर्म नहीं होगा। राज्य सभी धर्मों को समान संरक्षण और सम्मान देगा।
5. Brief History of Indian Constitution (भारतीय संविधान का संक्षिप्त इतिहास)
भारतीय संविधान अचानक एक दिन में नहीं बना, बल्कि यह वर्षों के औपनिवेशिक इतिहास, राष्ट्रीय आंदोलन और विचार-विमर्श का परिणाम है।
[1773-1947: ब्रिटिश काल के नियम]
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[1934: M.N. Roy द्वारा संविधान सभा की मांग]
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[1946: कैबिनेट मिशन योजना → संविधान सभा का गठन]
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[26 नवम्बर 1949: संविधान अंगीकृत (Adopted)]
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[26 जनवरी 1950: संविधान लागू (Enforced)]
मुख्य ऐतिहासिक मील के पत्थर:
- M.N. Roy (1934): भारत के लिए संविधान सभा (Constituent Assembly) का विचार सबसे पहले 1934 में मानवेन्द्र नाथ रॉय (M.N. Roy) ने रखा था।
- कांग्रेस की मांग (1935): भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से पहली बार संविधान सभा के गठन की मांग की।
- कैबिनेट मिशन (Cabinet Mission 1946): इसके तहत भारत की संविधान सभा का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से हुआ।
- संविधान सभा की पहली बैठक: 9 दिसंबर 1946 को हुई, जिसमें सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष चुना गया। बाद में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को स्थायी अध्यक्ष चुना गया।
- प्रारूप समिति (Drafting Committee): 29 अगस्त 1947 को गठित की गई, जिसके अध्यक्ष डॉ. बी.आर. अंबेडकर थे।
- समय अवधि: संविधान को पूरा बनने में 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा।
- अंगीकरण एवं लागू होना:
- 26 नवंबर 1949: संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित (Adopted) किया गया। (इसीलिए 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है)।
- 26 जनवरी 1950: संविधान पूरी तरह से लागू (Enforced) हुआ। (इसी दिन भारत गणतंत्र बना)।
6. Salient Features of the Indian Constitution (भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएँ)
भारतीय संविधान दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संविधानों का एक अनूठा मिश्रण है। इसकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. सबसे लंबा और विस्तृत लिखित संविधान
मूल संविधान (1949) में 395 अनुच्छेद (Articles), 22 भाग (Parts) और 8 अनुसूचियां (Schedules) थीं। वर्तमान में संशोधनों के बाद इसमें लगभग 470+ अनुच्छेद, 25 भाग और 12 अनुसूचियां हैं।
- विस्तृत होने के कारण: भारत का विशाल आकार, भौगोलिक विविधता, 1935 के अधिनियम का प्रभाव, और केंद्र व राज्यों के लिए एक ही संविधान होना।
2. विभिन्न स्रोतों से ग्रहीत (Drawn from Various Sources)
डॉ. अंबेडकर के शब्दों में, भारतीय संविधान का निर्माण “विश्व के सभी प्रमुख संविधानों को छानने (Ransacking) के बाद” किया गया था।
3. नम्यता और अनम्यता का अनोखा मिश्रण (Blend of Rigidity and Flexibility)
- कठोर (Rigid): कुछ प्रावधानों को बदलने के लिए विशेष बहुमत (Special Majority) और आधे राज्यों की सहमति की आवश्यकता होती है (जैसे अनुच्छेद 368 के तहत संघी ढांचे में बदलाव)।
- लचीला (Flexible): कुछ प्रावधान साधारण बहुमत (Simple Majority) से ही बदले जा सकते हैं (जैसे नए राज्यों का गठन)।
4. एकात्मकता की ओर झुकाव के साथ संघीय व्यवस्था (Federal System with Unitary Bias)
भारत के संविधान में संघ (Federal) शब्द का प्रयोग कहीं नहीं हुआ है। अनुच्छेद 1 भारत को “राज्यों का संघ” (Union of States) कहता है।
- संघीय लक्षण: दो सरकारें (केंद्र व राज्य), शक्तियों का विभाजन, लिखित संविधान, न्यायपालिका की स्वतंत्रता।
- एकात्मक लक्षण: मजबूत केंद्र, एकल नागरिकता, आपातकालीन प्रावधान, एकीकृत न्यायपालिका, अखिल भारतीय सेवाएं (IAS/IPS)।
5. सरकार का संसदीय रूप (Parliamentary Form of Government)
भारत ने ब्रिटिश मॉडल पर आधारित संसदीय प्रणाली को अपनाया है, जो विधायिका और कार्यपालिका के बीच सहयोग और समन्वय के सिद्धांत पर आधारित है।
- वास्तविक कार्यपालिका प्रधान प्रधानमंत्री होता है, जबकि राष्ट्रपति नाममात्र का प्रमुख होता है।
6. मौलिक अधिकार, DPSP और मौलिक कर्तव्य
- भाग III: नागरिकों को 6 मौलिक अधिकार देता है जो न्यायसंगत (Justiciable) हैं।
- भाग IV: राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP) जो कल्याणकारी राज्य की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करते हैं (गैर-न्यायसंगत)।
- भाग IV-A: 42वें संविधान संशोधन 1976 द्वारा नागरिकों के मौलिक कर्तव्य जोड़े गए।
7. स्वतंत्र और एकीकृत न्यायपालिका (Integrated and Independent Judiciary)
भारत में शीर्ष पर सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court), उसके नीचे उच्च न्यायालय (High Court) और सबसे नीचे अधीनस्थ न्यायालय (Subordinate Courts) हैं। न्यायपालिका को कार्यपालिका के प्रभाव से पूरी तरह स्वतंत्र रखा गया है।
8. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Suffrage)
प्रत्येक नागरिक जिसकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक है, उसे बिना किसी भेदभाव के वोट देने का अधिकार है। (61वें संविधान संशोधन 1988 द्वारा मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 की गई थी)।
7. Major Sources of the Indian Constitution (संविधान के प्रमुख स्रोत)
डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने गर्व से कहा था कि भारत के संविधान का निर्माण “दुनिया के सभी मुख्य संविधानों को छानने और परखने (Ransacking all known Constitutions) के बाद” किया गया है। संविधान निर्माताओं ने केवल नकल नहीं की, बल्कि विदेशी सिद्धांतों को भारतीय सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक परिस्थितियों के अनुकूल ढाला।
भारतीय संविधान के स्रोतों को दो भागों में बांटा जा सकता है:
- आंतरिक स्रोत (Internal Sources): भारत सरकार अधिनियम, 1935
- बाह्य स्रोत (External Sources): अन्य देशों के संविधान।
Detailed Breakdown of Sources (विस्तृत विवरण)
1. भारत सरकार अधिनियम, 1935 (Government of India Act, 1935)
यह भारतीय संविधान का सबसे बड़ा और मुख्य ढांचागत स्रोत (Structural Source) है। वर्तमान संविधान के लगभग 250 से अधिक अनुच्छेद या तो सीधे इस अधिनियम से लिए गए हैं या उनमें थोड़ा बदलाव किया गया है।
- संघीय योजना (Federal Scheme): केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का बंटवारा (3 सूचियां: संघ, राज्य, समवर्ती)।
- राज्यपाल का कार्यालय (Office of Governor): राज्य के संवैधानिक प्रमुख के रूप में भूमिका।
- न्यायपालिका का ढांचा (Judiciary Structure): एकीकृत और स्वतंत्र न्यायपालिका की अवधारणा।
- लोक सेवा आयोग (Public Service Commissions): संघ (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) का ढांचा।
- आपातकालीन प्रावधान (Emergency Provisions): आपातकाल के प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक नियम।
- प्रशासनिक विवरण (Administrative Details): विस्तृत नौकरशाही और शासन संचालन के नियम।
2. ब्रिटेन का संविधान (British Constitution)
भारत पर लगभग 200 वर्षों तक ब्रिटिश शासन रहा, इसलिए भारतीय शासन प्रणाली में ब्रिटिश संसदीय व्यवस्था की गहरी छाप है।
- संसदीय शासन प्रणाली (Parliamentary Form of Government): कार्यपालिका का विधायिका के प्रति जवाबदेह होना।
- विधि का शासन (Rule of Law): कानून के समक्ष सभी नागरिकों की समानता (अनुच्छेद 14)।
- विधायी प्रक्रिया (Legislative Procedure): कानून बनाने की चरणबद्ध संसदीय प्रक्रिया।
- एकल नागरिकता (Single Citizenship): पूरे देश के लिए केवल एक (भारतीय) नागरिकता, राज्यों की अलग नागरिकता नहीं।
- मंत्रिमंडल प्रणाली (Cabinet System): वास्तविक कार्यपालिका शक्तियां प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट के पास होना।
- परमाधिकार लेख (Writs): नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायपालिका द्वारा जारी की जाने वाली रिट (अनुच्छेद 32 और 226)।
- संसदीय विशेषाधिकार (Parliamentary Privileges): सांसदों और संसद को मिलने वाले विशेष कानूनी अधिकार।
- द्विसदनीय व्यवस्था (Bicameralism): संसद के दो सदन—लोकसभा और राज्यसभा।
3. संयुक्त राज्य अमेरिका का संविधान (US Constitution)
अमेरिकी संविधान से मुख्य रूप से नागरिक अधिकारों और न्यायपालिका की स्वतंत्रता से जुड़े सिद्धांत लिए गए हैं।
- मौलिक अधिकार (Fundamental Rights): संविधान के भाग III (अनुच्छेद 12-35) में दर्ज 6 मूल अधिकार।
- न्यायपालिका की स्वतंत्रता (Independence of Judiciary): न्यायपालिका पर कार्यपालिका या विधायिका का दबाव न होना।
- न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review): असंवैधानिक कानूनों को रद्द करने की न्यायपालिका की शक्ति।
- राष्ट्रपति पर महाभियोग (Impeachment of the President): राष्ट्रपति को पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया।
- उच्चतम और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को हटाया जाना: न्यायाधीशों को पद से हटाने की प्रक्रिया।
- उपराष्ट्रपति का पद (Post of Vice-President): उपराष्ट्रपति का राज्यसभा का पदेन सभापति होना।
- संविधान की सर्वोच्चता (Supremacy of Constitution): यह विचार कि देश में संविधान ही सर्वोच्च है।
4. आयरलैंड का संविधान (Irish Constitution)
- राज्य के नीति निदेशक तत्व (Directive Principles of State Policy – DPSP): भाग IV में दर्ज राज्य के लिए दिशा-निर्देश।
- राष्ट्रपति की निर्वाचन पद्धति (Method of Election of President): आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली।
- राज्यसभा में सदस्यों का नामांकन: साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा के क्षेत्र से राष्ट्रपति द्वारा 12 सदस्यों का मनोनयन।
5. कनाडा का संविधान (Canadian Constitution)
- सशक्त केंद्र के साथ संघीय व्यवस्था: केंद्र सरकार को राज्यों की तुलना में अधिक शक्तियां देना।
- अवशिष्ट शक्तियों का केंद्र में निहित होना (Residuary Powers): बची हुई शक्तियों पर कानून बनाने का अधिकार केवल केंद्र को होना।
- केंद्र द्वारा राज्यों के राज्यपालों की नियुक्ति: राज्यपालों पर केंद्र का नियंत्रण।
- उच्चतम न्यायालय का परामर्शी न्याय-निर्णयन (Advisory Jurisdiction): राष्ट्रपति द्वारा कानूनी प्रश्नों पर सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श लेने की शक्ति (अनुच्छेद 143)।
6. ऑस्ट्रेलिया का संविधान (Australian Constitution)
- समवर्ती सूची (Concurrent List): ऐसे विषय जिन पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।
- व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता: अंतर-राज्यीय व्यापार की आजादी।
- संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting): साधारण विधेयक पर गतिरोध दूर करने के लिए बुलाई जाने वाली बैठक (अनुच्छेद 108)।
7. जर्मनी का वाइमर संविधान (Weimar Constitution)
- आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों का स्थगन: राष्ट्रीय आपातकाल के समय नागरिकों के मूल अधिकारों का निलंबित हो जाना।
8. सोवियत संघ / रूस का संविधान (USSR Constitution)
- मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties): भाग IV-A (अनुच्छेद 51A) में शामिल किए गए कर्तव्य।
- प्रस्तावना में न्याय का आदर्श: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय का विचार।
9. दक्षिण अफ्रीका का संविधान (South African Constitution)
- संविधान संशोधन की प्रक्रिया: अनुच्छेद 368 के तहत संविधान में संशोधन का तरीका।
- राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन: राज्य विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा राज्यसभा सांसदों का चुनाव।
10. फ्रांस का संविधान (French Constitution)
- गणतंत्रात्मक ढांचा (Republic Structure): चुना हुआ राष्ट्राध्यक्ष (राष्ट्रपति)।
- स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व (Liberty, Equality, Fraternity): प्रस्तावना के मुख्य आदर्श।
11. जापान का संविधान (Japanese Constitution)
- विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया (Procedure Established by Law): अनुच्छेद 21 में उल्लिखित कानूनी सिद्धांत।
Quick Revision Summary (त्वरित दोहराव तालिका)
| स्रोत देश / अधिनियम | मुख्य ग्रहीत प्रावधान (Key Adopted Features) |
| भारत सरकार अधिनियम, 1935 | 250+ अनुच्छेद, न्यायपालिका का ढांचा, राज्यपाल का पद, लोक सेवा आयोग |
| ब्रिटेन | संसदीय प्रणाली, विधि का शासन (Rule of Law), एकल नागरिकता, द्विसदनीय व्यवस्था |
| संयुक्त राज्य अमेरिका | मौलिक अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review), राष्ट्रपति महाभियोग, उपराष्ट्रपति |
| आयरलैंड | राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP), राष्ट्रपति निर्वाचन पद्धति, 12 मनोनीत सदस्य |
| कनाडा | सशक्त केंद्र के साथ संघ, अवशिष्ट शक्तियां (Residuary Powers) केंद्र के पास |
| ऑस्ट्रेलिया | समवर्ती सूची (Concurrent List), संसद की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) |
| जर्मनी | आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों का स्थगन |
| रूस (USSR) | मौलिक कर्तव्य, प्रस्तावना में सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक न्याय |
| दक्षिण अफ्रीका | संविधान संशोधन प्रक्रिया (अनुच्छेद 368), राज्यसभा सदस्यों का चुनाव |
| फ्रांस | गणतंत्रात्मक व्यवस्था, स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व के आदर्श |
| जापान | विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया (Procedure Established by Law) |
8. Importance of the Constitution in Governance (शासन व्यवस्था में महत्व)
- कानूनी निरंतरता (Legal Continuity): यह देश में अराजकता को रोकता है और शासन को व्यवस्थित तरीके से चलाने की रूपरेखा देता है।
- नागरिक अधिकारों का रक्षक: यह राज्य की किसी भी दमनात्मक कार्रवाई के खिलाफ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है।
- सामाजिक परिवर्तन का जरिया: अस्पृश्यता (Untouchability) का उन्मूलन, महिलाओं और वंचित वर्गों को आरक्षण जैसे प्रावधानों के माध्यम से संविधान ने भारतीय समाज में क्रांति लाने का काम किया है।
- लोकतांत्रिक स्थिरता: पड़ोस के कई देशों में बार-बार तख्तापलट हुए, लेकिन भारतीय संविधान की मजबूती के कारण भारत में लोकतंत्र लगातार फल-फूल रहा है।
9. Quick Revision & One-Liner Exam Facts
- संविधान सभा का गठन: कैबिनेट मिशन योजना (1946) के तहत।
- अस्थायी अध्यक्ष: डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा (9 दिसंबर 1946)।
- स्थायी अध्यक्ष: डॉ. राजेंद्र प्रसाद (11 दिसंबर 1946)।
- प्रारूप समिति के अध्यक्ष: डॉ. बी.आर. अंबेडकर (सदस्यों की कुल संख्या: 7)।
- संवैधानिक सलाहकार (Constitutional Advisor): सर बी.एन. राव (B.N. Rau)।
- उद्देश्य प्रस्ताव (Objective Resolution): पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को प्रस्तुत किया गया (जो बाद में प्रस्तावना बना)।
- संविधान बनने में लगा कुल समय: 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन।
- मूल संविधान के सुलेखक (Calligrapher): प्रेम बिहारी नारायण रायजादा (इतालवी शैली में हस्तलिखित)।
- मूल संविधान का सौंदर्यकरण: शांतिनिकेतन के कलाकारों (नंदलाल बोस और राममनोहर सिन्हा) द्वारा।
- संविधान दिवस: 26 नवंबर (अंगीकरण की तिथि)।
- भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है।
- संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई।
- संविधान 26 जनवरी 1950 से पूर्णतः लागू हुआ।
- संविधान निर्माण में लगभग 64 लाख रुपये का खर्च आया।
- मूल संविधान हाथों से लिखा गया था और संसद भवन के पुस्तकालय में हीलियम गैस के कांच बॉक्स में सुरक्षित रखा गया है।
- भारत के राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगे) को 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था।
10. Previous Year Questions (PYQs)
Q1. भारतीय संविधान को 26 जनवरी के दिन लागू करने का निर्णय क्यों लिया गया? (UPSC CSE / State PSC)
- (A) यह एक शुभ दिन था।
- (B) इस तिथि को 1930 में स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया गया था।
- (C) भारत छोड़ो आंदोलन इसी दिन शुरू हुआ था।
- (D) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर: (B)
व्याख्या: 1929 के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित हुआ था और 26 जनवरी 1930 को पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था। उसी की स्मृति को बनाए रखने के लिए 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया गया।
Q2. भारत के संविधान में ‘समवर्ती सूची’ (Concurrent List) की अवधारणा किस देश से ली गई है? (SSC / WBPSC / BPSC)
- (A) कनाडा
- (B) ऑस्ट्रेलिया
- (C) अमेरिका
- (D) ब्रिटेन
उत्तर: (B)
व्याख्या: समवर्ती सूची का विचार ऑस्ट्रेलिया के संविधान से लिया गया है।
Q3. “भारतीय संविधान विभिन्न स्रोतों से लिया गया एक पैचवर्क (Patchwork) नहीं है, बल्कि भारतीय आवश्यकताओं के अनुकूल बनाया गया एक अनूठा दस्तावेज है।” चर्चा कीजिए।
उत्तर की रूपरेखा (Model Outline):
- भूमिका: संविधान पर विदेशी प्रभावों के आरोपों का उल्लेख करें।
- मुख्य भाग: डॉ. अंबेडकर के तर्क को उद्धृत करें (“Ransacking all known Constitutions”)। उदाहरण दें कि कैसे हमने अमेरिकी मौलिक अधिकारों को निरपेक्ष (Absolute) नहीं बनाया, बल्कि उन पर युक्तियुक्त प्रतिबंध (Reasonable Restrictions) लगाए। ब्रिटेन की संसदीय प्रणाली अपनाई, लेकिन उनकी तरह संसद को सर्वोच्च न बनाकर संविधान को सर्वोच्च बनाया।
- निष्कर्ष: भारतीय संविधान उधार का थैला नहीं, बल्कि भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक यथार्थ के अनुरूप ढाला गया एक जीवंत दस्तावेज है।
11. Practice Multiple Choice Questions (MCQs)
Q1. निम्नलिखित में से कौन सा कथन भारतीय संविधान के संदर्भ में सत्य नहीं है?
- यह विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है।
- इसमें केवल कठोरता (Rigidity) के लक्षण हैं।
- यह भारत को ‘राज्यों का संघ’ घोषित करता है।
- इसमें एकल नागरिकता का प्रावधान है।
- (A) केवल 1 और 3
- (B) केवल 2
- (C) केवल 2 और 4
- (D) उपर्युक्त सभी सत्य हैं
उत्तर: (B)
व्याख्या: भारतीय संविधान कठोरता और लचीलेपन का मिश्रण है, यह केवल कठोर नहीं है। इसलिए कथन 2 असत्य है।
Q2. भारत में ‘कानून का शासन’ (Rule of Law) की अवधारणा किस देश के संविधान से ली गई है?
- (A) संयुक्त राज्य अमेरिका
- (B) फ्रांस
- (C) ब्रिटेन
- (D) कनाडा
उत्तर: (C)
व्याख्या: ‘विधि का शासन’ या कानून का शासन ब्रिटेन के संविधान से लिया गया है।
Q3. संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार कौन थे?
- (A) डॉ. बी.आर. अंबेडकर
- (B) के.एम. मुंशी
- (C) सर बी.एन. राव
- (D) डॉ. राजेंद्र प्रसाद
उत्तर: (C)
व्याख्या: सर बी.एन. राव (B.N. Rau) संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार थे।
12. Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1: क्या भारत का संविधान एक ‘उधार का थैला’ (Bag of Borrowings) है?
उत्तर: आलोचक इसे उधार का थैला कहते हैं क्योंकि इसके कई प्रावधान विदेशी संविधानों से प्रेरित हैं। हालांकि, यह पूरी तरह सच नहीं है। संविधान निर्माताओं ने अन्य देशों के प्रावधानों को ज्यों का त्यों नहीं अपनाया, बल्कि भारतीय समाज की जरूरतों, विविधताओं और परिस्थितियों के अनुसार उनमें संशोधन करके स्वीकार किया।
Q2: संविधान सभा का चुनाव कैसे हुआ था?
उत्तर: संविधान सभा का चुनाव प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से (Indirect Election) एकल संक्रमणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote) के माध्यम से हुआ था। यह सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार पर सीधे जनता द्वारा नहीं चुनी गई थी।
Q3: 26 नवंबर और 26 जनवरी के बीच क्या अंतर है?
उत्तर: 26 नवंबर 1949 को संविधान बनकर तैयार हुआ था और सभा द्वारा इसे अंगीकृत (Adopted) किया गया था (इसीलिए इस दिन ‘संविधान दिवस’ मनाया जाता है)। जबकि 26 जनवरी 1950 को इसे पूरी तरह लागू (Enforced) किया गया था (इसीलिए इस दिन ‘गणतंत्र दिवस’ मनाया जाता है)।
