President of India (भारत का राष्ट्रपति) – Articles, Election, Powers, PYQs & MCQs

President of India: भारतीय संविधान के तहत भारत में संसदीय शासन प्रणाली (Parliamentary System of Governance) को अपनाया गया है। इसमें राष्ट्रपति (President) राष्ट्र का प्रमुख (Head of State) और भारत का प्रथम नागरिक (First Citizen of India) होता है।

संवैधानिक रूप से राष्ट्रपति देश का कार्यपालक प्रमुख (Executive Head) होता है, लेकिन वह मुख्य रूप से एक संवैधानिक या नाम मात्र का प्रमुख (De Jure / Nominal Executive) है। वास्तविक कार्यपालक शक्तियां (De Facto Executive) प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) में निहित होती हैं।

भारतीय संविधान के भाग V (Part V) में अनुच्छेद 52 से 62 तक राष्ट्रपति से संबंधित प्रमुख प्रावधानों का वर्णन किया गया है।

  • राष्ट्र की एकता और अखंडता का प्रतीक: राष्ट्रपति पद भारत की संप्रभुता, राष्ट्रीय एकता और अखंडता का प्रतिनिधित्व करता है।
  • ब्रिटेन के सम्राट से तुलना: भारत के राष्ट्रपति की संवैधानिक स्थिति ब्रिटेन के राजा/रानी के समान है, जो राज्य करते हैं लेकिन शासन नहीं करते। हालांकि, ब्रिटेन में पद वंशानुगत है, जबकि भारत में राष्ट्रपति जनता द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुना जाता है, इसीलिए भारत एक गणराज्य (Republic) है।
  • संसद का अभिन्न अंग (Integral Part of Parliament): अनुच्छेद 79 के अनुसार, भारत की संसद राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा से मिलकर बनती है। राष्ट्रपति किसी भी सदन का सदस्य नहीं होता, फिर भी वह संसद का अनिवार्य हिस्सा है।
[अनुच्छेद 52] ──> भारत का एक राष्ट्रपति होगा
[अनुच्छेद 53] ──> संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी
[अनुच्छेद 54] ──> राष्ट्रपति का निर्वाचक मंडल (Electoral College)
[अनुच्छेद 55] ──> निर्वाचन की रीति (Election Procedure)
[अनुच्छेद 56] ──> पद की अवधि (Tenure - 5 Years)
[अनुच्छेद 57] ──> पुनर्निर्वाचन के लिए पात्रता (Re-election Eligibility)
[अनुच्छेद 58] ──> योग्यताएं (Qualifications)
[अनुच्छेद 59] ──> पद के लिए शर्तें (Conditions of Office)
[अनुच्छेद 60] ──> शपथ या प्रतिज्ञान (Oath by CJI)
[अनुच्छेद 61] ──> महाभियोग की प्रक्रिया (Impeachment)
[अनुच्छेद 62] ──> पद की रिक्ति को भरने के लिए चुनाव का समय

कोई व्यक्ति राष्ट्रपति निर्वाचित होने के लिए तभी पात्र होगा जब वह:

  1. भारत का नागरिक हो।
  2. 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।
  3. लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता रखता हो।
  4. केंद्र सरकार, राज्य सरकार या किसी स्थानीय/सार्वजनिक प्राधिकारी के अधीन लाभ के पद (Office of Profit) पर न हो।
    • नोट: वर्तमान राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यों के राज्यपाल और संघ/राज्य के मंत्री पद को ‘लाभ का पद’ नहीं माना जाता है।
  • उम्मीदवार के नामांकन पत्र पर कम से कम 50 प्रस्तावक (Proposers) और 50 अनुमोदक (Seconders) निर्वाचक मंडल के सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए।
  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में ₹15,000 की जमानत राशि (Security Deposit) जमा करनी होती है। यदि उम्मीदवार को कुल डाले गए वैध मतों का 1/6 भाग प्राप्त नहीं होता, तो उसकी जमानत राशि जब्त हो जाती है।
  • राष्ट्रपति को पद और गोपनीयता की शपथ भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India – CJI) दिलाते हैं। उनकी अनुपस्थिति में सर्वोच्च न्यायालय के उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायाधीश द्वारा शपथ दिलाई जाती है।

राष्ट्रपति का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा नहीं, बल्कि एक निर्वाचक मंडल (Electoral College) द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से होता है।

शामिल होने वाले सदस्य (Who CAN Vote)शामिल न होने वाले सदस्य (Who CANNOT Vote)
1. संसद के दोनों सदनों (लोकसभा + राज्यसभा) के केवल निर्वाचित सदस्य (Elected Members)1. संसद के दोनों सदनों के मनोनीत सदस्य (Nominated Members)
2. राज्यों की विधानसभाओं (Legislative Assemblies) के निर्वाचित सदस्य2. राज्यों की विधान परिषदों (Legislative Councils) के सदस्य (निर्वाचित व मनोनीत दोनों)।
3. दिल्ली और पुडुचेरी (तथा जम्मू-कश्मीर) केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य (70वें संशोधन 1992 द्वारा जोड़ा गया)।3. राज्यों/UTs की विधानसभाओं के मनोनीत सदस्य।

अनुच्छेद 71 (विधानसभा भंग होने पर चुनाव): यदि राष्ट्रपति चुनाव के समय किसी राज्य की विधानसभा भंग हो, तब भी राष्ट्रपति का चुनाव रोका नहीं जाएगा। निर्वाचक मंडल में किसी सीट के खाली होने के आधार पर चुनाव को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती।

  • चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation System) के अनुसार एकल संक्रमणीय मत पद्धति (Single Transferable Vote System) और गुप्त मतदान (Secret Ballot) द्वारा होता है।

राज्यों की जनसंख्या और विधायकों के प्रतिनिधित्व में समानता बनाए रखने के लिए मतों का मूल्य निकाला जाता है (जनसंख्या 1971 की जनगणना के आधार पर तय की जाती है, जो 84वें संशोधन 2001 के अनुसार 2026 तक लागू रहेगी):

1. एक विधायक के मत का मूल्य (Value of an MLA’s Vote):

MLA Vote Value = (राज्य की कुल जनसंख्या / विधानसभा के कुल निर्वाचित सदस्य) × (1 / 1000)

2. एक सांसद के मत का मूल्य (Value of an MP’s Vote):

MP Vote Value = (सभी राज्यों के विधायकों के मतों का कुल मूल्य) / (संसद के निर्वाचित सदस्यों की संख्या)

जीतने के लिए उम्मीदवार को डाले गए कुल वैध मतों के आधे से अधिक मत प्राप्त करने होते हैं:

Electoral Quota = (कुल वैध मत / 2) + 1

  • पद ग्रहण की तिथि से 5 वर्ष
  • राष्ट्रपति अपना त्यागपत्र उपराष्ट्रपति (Vice President) को संबोधित करके देता है (उपराष्ट्रपति इसकी सूचना तुरंत लोकसभा अध्यक्ष को देता है)।
  • पुनर्निर्वाचन (Article 57): भारत में कोई व्यक्ति कितनी भी बार राष्ट्रपति के रूप में पुनः निर्वाचित हो सकता है (अमेरिका में अधिकतम 2 बार का नियम है)।

राष्ट्रपति को केवल “संविधान के अतिक्रमण” (Violation of the Constitution) के आधार पर ही पद से हटाया जा सकता है (संविधान में इस शब्द को परिभाषित नहीं किया गया है)।

[संसद के किसी भी सदन में प्रस्ताव] ──> 1/4 सदस्यों के हस्ताक्षर + 14 दिन की लिखित सूचना
               │
[प्रथम सदन में चर्चा एवं मतदान] ──> कुल सदस्यता के 2/3 विशेष बहुमत से पारित
               │
[द्वितीय सदन द्वारा जांच]    ──> राष्ट्रपति स्वयं या अपने प्रतिनिधि द्वारा पक्ष रख सकता है
               │
[द्वितीय सदन में मतदान]       ──> कुल सदस्यता के 2/3 विशेष बहुमत से पारित ──> पद से बर्खास्त
  • विशेष नोट: महाभियोग एक अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया (Quasi-Judicial Process) है। इसमें संसद के मनोनीत सदस्य भी भाग लेते हैं, लेकिन राज्य विधानसभाओं के सदस्य भाग नहीं लेते।

यदि राष्ट्रपति का पद मृत्यु, त्यागपत्र या महाभियोग के कारण रिक्त होता है, तो:

  1. उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा।
  2. यदि उपराष्ट्रपति का पद भी रिक्त है, तो भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) कार्यवाहक राष्ट्रपति बनेंगे (जैसे—1969 में न्यायमूर्ति एम. हिदायतुल्ला बने थे)।
  3. पद रिक्त होने की तिथि से 6 महीने के भीतर नए राष्ट्रपति का चुनाव कराना अनिवार्य है।
  • भारत सरकार के सभी शासन संबंधी कार्य राष्ट्रपति के नाम से किए जाते हैं।
  • वह प्रधानमंत्री और उनकी सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है।
  • वह भारत के महान्यायवादी (Attorney General), CAG, मुख्य चुनाव आयुक्त, UPSC के अध्यक्ष व सदस्यों, और राज्यों के राज्यपालों की नियुक्ति करता है।
  • वह किसी भी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र (Scheduled Area) घोषित कर सकता है।
  • संसद के सत्र को आहूत (Summon) करने, सत्रावसान (Prorogue) करने और लोकसभा को भंग (Dissolve) करने की शक्ति।
  • संयुक्त बैठक (Joint Sitting – Article 108): दोनों सदनों के गतिरोध पर संयुक्त बैठक बुलाई जाती है (अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करते हैं)।
  • विधेयक पर स्वीकृति: संसद द्वारा पारित विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद ही कानून बनता है।

राष्ट्रपति की वीटो शक्तियां (Veto Powers – Article 111):

वीटो का प्रकारअर्थ / प्रयोगभारत में स्थिति / उदाहरण
1. अत्यांतिक वीटो (Absolute Veto)विधेयक पर अपनी सहमति पूरी तरह रोकना (विधेयक समाप्त)।गैर-सरकारी (Private Member) विधेयकों पर।
2. निलंबनकारी वीटो (Suspensive Veto)विधेयक को संसद के पास पुनर्विचार के लिए वापस भेजना।साधारण विधेयक पर (संसद पुनः पास करे तो सहमति देनी ही होगी)।
3. जेबी वीटो (Pocket Veto)विधेयक पर अनिश्चित काल के लिए कोई निर्णय न लेना।1986 में ज्ञानी जैल सिंह ने भारतीय डाकघर (संशोधन) विधेयक पर प्रयोग किया था।
  • अध्यादेश जारी करने की शक्ति (Ordinance Power – Article 123): जब संसद का सत्र न चल रहा हो, तो वह अध्यादेश जारी कर सकता है।
  • अध्यादेश की अधिकतम अवधि (Maximum Validity): अध्यादेश की अधिकतम कानूनी अवधि 6 महीने 6 सप्ताह (लगभग 7.5 महीने) होती है। (क्योंकि दो सत्रों के बीच अधिकतम अंतर 6 महीने हो सकता है + सत्र शुरू होने पर 6 सप्ताह का समय मिलता है)।
  • धन विधेयक (Money Bill): केवल राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति से ही लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।
  • वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट – Article 112) को संसद के समक्ष रखवाता है।
  • भारत की आकस्मिकता निधि (Contingency Fund of India – Article 267) राष्ट्रपति के नियंत्रण में होती है।
  • हर 5 साल में वित्त आयोग (Finance Commission – Article 280) का गठन करता है।
  • सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति।
  • क्षमादान की शक्ति (Pardoning Power – Article 72):
    • क्षमा (Pardon): सजा और दंड दोनों को पूरी तरह समाप्त कर देना।
    • लघूकरण (Commutation): दंड के स्वरूप को बदलना (जैसे मृत्युदंड को कठोर कारावास में बदलना)।
    • परिहार (Remission): दंड के स्वरूप को बदले बिना उसकी अवधि कम करना।
    • विराम (Respite): विशेष परिस्थितियों (जैसे गर्भावस्था या विकलांगता) में सजा को कम करना।
    • प्रविलंबन (Reprieve): मृत्युदंड या सजा के निष्पादन पर अस्थायी रोक लगाना।(नोट: राष्ट्रपति सैन्य अदालत (Court Martial) और मृत्युदंड दोनों मामलों में क्षमादान दे सकता है।)
  • राष्ट्रपति भारत के सशस्त्र बलों का सर्वोच्च सेनापति (Supreme Commander) होता है। वह थल सेना, नौसेना और वायुसेना के प्रमुखों की नियुक्ति करता है।
  • अंतरराष्ट्रीय संधियां और समझौते राष्ट्रपति के नाम से किए जाते हैं।

संवैधानिक सीमा (Constitutional Limit & Article 74 Binding):

  • अनुच्छेद 74 का प्रभाव: यद्यपि सभी अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ (Treaties), समझौते और युद्ध या शांति की औपचारिक घोषणाएं (Declaration of War & Peace) राष्ट्रपति के नाम से की जाती हैं, लेकिन राष्ट्रपति इन शक्तियों का प्रयोग अपनी स्वेच्छा से नहीं कर सकता।
  • कैबिनेट की लिखित सलाह: 44वें संविधान संशोधन (1978) और अनुच्छेद 74(1) के तहत राष्ट्रपति अंतर्राष्ट्रीय मामलों और सैन्य शक्तियों का प्रयोग केवल मंत्रिमंडल (Cabinet) की लिखित सलाह और सिफारिश पर ही करने के लिए बाध्य है। बिना कैबिनेट की मंजूरी के राष्ट्रपति युद्ध या शांति की घोषणा नहीं कर सकता।
  1. राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency – Article 352): युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह पर।
  2. राष्ट्रपति शासन (President’s Rule – Article 356 & 365): राज्यों में संवैधानिक तंत्र के विफल होने पर।
  3. वित्तीय आपातकाल (Financial Emergency – Article 360): भारत के वित्तीय स्थायित्व को खतरा होने पर।
                          [भारत के राष्ट्रपति (1950 - वर्तमान)]
                                           │
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[प्रथम राष्ट्रपति]                    [प्रथम महिला]                           [वर्तमान]
डॉ. राजेंद्र प्रसाद                 प्रतिभा देवीसिंह पाटिल                   द्रौपदी मुर्मू
(1950-1962, 12 वर्ष)                    (2007-2012)                     (2022-वर्तमान, प्रथम आदिवासी)
क्र.सं.राष्ट्रपति का नाम (Name)कार्यकाल (Tenure)विशेष तथ्य / परीक्षा उपयोगी बिंदु (Key Exam Facts)
1.डॉ. राजेंद्र प्रसाद26 जन. 1950 – 13 मई 1962• भारत के प्रथम राष्ट्रपति।
• सबसे लंबे समय (12 वर्ष) तक पद पर रहने वाले एकमात्र राष्ट्रपति।
• दो बार लगातार निर्वाचित होने वाले एकमात्र राष्ट्रपति।
2.डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन13 मई 1962 – 13 मई 1967• भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति (1952-1962)।
• इनके जन्मदिन (5 सितंबर) को ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
• 1954 में प्रथम ‘भारत रत्न’ प्राप्तकर्ता।
3.डॉ. जाकिर हुसैन13 मई 1967 – 3 मई 1969• भारत के प्रथम मुस्लिम राष्ट्रपति।
• अपने कार्यकाल के दौरान मृत्यु को प्राप्त होने वाले प्रथम राष्ट्रपति।
• सबसे छोटा कार्यकाल (लगभग 2 वर्ष)।
वी.वी. गिरि (कार्यवाहक)3 मई 1969 – 20 जुलाई 1969• जाकिर हुसैन की मृत्यु के बाद भारत के प्रथम कार्यवाहक राष्ट्रपति (Acting President)
न्यायमूर्ति एम. हिदायतुल्ला (कार्यवाहक)20 जुलाई 1969 – 24 अग. 1969• भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जो कार्यवाहक राष्ट्रपति बने।
4.वी.वी. गिरि (वराहगिरी वेंकट गिरि)24 अग. 1969 – 24 अग. 1974• एकमात्र राष्ट्रपति जिनके चुनाव में द्वितीय चक्र की मतगणना (Second Preference Votes) करनी पड़ी।
• स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुने जाने वाले एकमात्र राष्ट्रपति।
5.फ़ख़रुद्दीन अली अहमद24 अग. 1974 – 11 फर. 1977• 1975 में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा पर हस्ताक्षर करने वाले राष्ट्रपति।
• पद पर रहते हुए मृत्यु को प्राप्त होने वाले दूसरे राष्ट्रपति।
बी.डी. जत्ती (कार्यवाहक)11 फर. 1977 – 25 जुलाई 1977• फ़ख़रुद्दीन अली अहमद की मृत्यु के बाद कार्यवाहक राष्ट्रपति बने।
6.नीलम संजीव रेड्डी25 जुलाई 1977 – 25 जुलाई 1982• भारत के एकमात्र राष्ट्रपति जो निर्विरोध (Unopposed) चुने गए।
• राष्ट्रपति बनने से पहले आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष रहे।
7.ज्ञाता जैल सिंह25 जुलाई 1982 – 25 जुलाई 1987• भारत के प्रथम सिख राष्ट्रपति।
• 1986 में भारतीय डाकघर (संशोधन) विधेयक पर पहली बार ‘जेबी वीटो’ (Pocket Veto) का प्रयोग किया।
8.आर. वेंकटरमण (रामास्वामी वेंकटरमण)25 जुलाई 1987 – 25 जुलाई 1992• अपने कार्यकाल में सर्वाधिक (4) प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने वाले राष्ट्रपति।
9.डॉ. शंकर दयाल शर्मा25 जुलाई 1992 – 25 जुलाई 1997• प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रपति बनने से पहले भारत के उपराष्ट्रपति।
10.के.आर. नारायणन (कोचेरिल रामन नारायणन)25 जुलाई 1997 – 25 जुलाई 2002• भारत के प्रथम दलित राष्ट्रपति।
• लोकसभा चुनाव में मतदान करने वाले पहले राष्ट्रपति।
11.डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम25 जुलाई 2002 – 25 जुलाई 2007• “मिसाइल मैन” के नाम से प्रसिद्ध गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले प्रथम राष्ट्रपति।
• ‘जनता के राष्ट्रपति’ (People’s President) के रूप में विख्यात।
12.प्रतिभा देवीसिंह पाटिल25 जुलाई 2007 – 25 जुलाई 2012भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति
• राष्ट्रपति बनने से पहले राजस्थान की राज्यपाल रहीं।
13.प्रणब मुखर्जी25 जुलाई 2012 – 25 जुलाई 2017• अनुभवी अर्थशास्त्री और पूर्व केंद्रीय वित्त व विदेश मंत्री। 2019 में भारत रत्न से सम्मानित।
14.रामनाथ कोविंद25 जुलाई 2017 – 25 जुलाई 2022• भारत के दूसरे दलित राष्ट्रपति। राष्ट्रपति बनने से पहले बिहार के राज्यपाल थे।
15.श्रीमती द्रौपदी मुर्मू25 जुलाई 2022 – वर्तमानभारत की प्रथम जनजातीय/आदिवासी (Tribal) महिला राष्ट्रपति
• भारत की दूसरी महिला राष्ट्रपति।
• स्वतंत्र भारत में पैदा होने वाली पहली राष्ट्रपति (जन्म: 20 जून 1958, ओडिशा)।
• सबसे कम उम्र में राष्ट्रपति बनने वाली व्यक्ति।
  1. शमशेर सिंह बनाम पंजाब राज्य (Samsher Singh Case – 1974):
    • सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि राष्ट्रपति अपनी कार्यपालक शक्तियों का प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना नहीं कर सकता। वह केवल एक संवैधानिक प्रमुख है।
  2. मारू राम बनाम भारत संघ (Maru Ram Case – 1980):
    • न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 72 के तहत क्षमादान की शक्ति का प्रयोग राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही करना होता है।
  3. एस.आर. बोम्मई मामला (S.R. Bommai Case – 1994):
    • अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) के प्रयोग को न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के अधीन लाया गया। न्यायालय राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा को रद्द कर सकता है यदि वह दुर्भावनापूर्ण पाई जाए।
  • कार्यपालिका का प्रमुख: अनुच्छेद 53
  • निर्वाचक मंडल: केवल निर्वाचित MP और MLA (विधान परिषद के सदस्य नहीं)।
  • नामांकन की शर्त: 50 प्रस्तावक, 50 अनुमोदक, ₹15,000 जमानत राशि।
  • न्यूनतम आयु: 35 वर्ष।
  • शपथ: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) द्वारा (Article 60)
  • महाभियोग का आधार: केवल ‘संविधान का अतिक्रमण’ (Article 61)
  • अध्यादेश शक्ति: अनुच्छेद 123 (अधिकतम अवधि: 6 माह 6 सप्ताह)
  • क्षमादान की शक्ति: अनुच्छेद 72
  • संयुक्त बैठक बुलाने की शक्ति: अनुच्छेद 108
  • प्रथम कार्यवाहक राष्ट्रपति: वी.वी. गिरि (1969)
  • निर्विरोध चुने गए एकमात्र राष्ट्रपति: नीलम संजीव रेड्डी (1977)
  • एकमात्र मुख्य न्यायाधीश जो कार्यवाहक राष्ट्रपति बने: न्यायपूर्ति एम. हिदायतुल्ला (1969)
  • सबसे लंबे समय तक कार्यकाल: डॉ. राजेंद्र प्रसाद (12 वर्ष)।
  • सबसे छोटा कार्यकाल: डॉ. जाकिर हुसैन (1 वर्ष 11 महीने)।
  • कार्यकाल में मृत्यु पाने वाले राष्ट्रपति (2): डॉ. जाकिर हुसैन (1969) एवं फ़ख़रुद्दीन अली अहमद (1977)
  • द्वितीय चक्र की मतगणना से चुने गए: वी.वी. गिरि (1969)
  • प्रथम महिला राष्ट्रपति: प्रतिभा देवीसिंह पाटिल (2007)
  • प्रथम आदिवासी एवं सबसे युवा राष्ट्रपति: द्रौपदी मुर्मू (2022)

Q1. भारत के राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में निम्नलिखित में से कौन शामिल नहीं होता है?

  • (A) लोकसभा के निर्वाचित सदस्य
  • (B) राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य
  • (C) राज्य विधान परिषदों के निर्वाचित सदस्य
  • (D) राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य

उत्तर: (C)

व्याख्या: अनुच्छेद 54 के अनुसार, राष्ट्रपति के चुनाव में राज्य विधान परिषदों (Legislative Councils) के सदस्य भाग नहीं लेते हैं।

Q2. राष्ट्रपति पर महाभियोग का प्रस्ताव संसद के किस सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है?

  • (A) केवल लोकसभा
  • (B) केवल राज्यसभा
  • (C) संसद के किसी भी सदन में
  • (D) केवल दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में

उत्तर: (C)

व्याख्या: अनुच्छेद 61(1) के तहत राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने का आरोप संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) द्वारा लगाया जा सकता है।

Q3. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्राप्त है?

  • (A) अनुच्छेद 111
  • (B) अनुच्छेद 123
  • (C) अनुच्छेद 213
  • (D) अनुच्छेद 72

उत्तर: (B)

व्याख्या: अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति संसद के विश्रांतिकाल में अध्यादेश जारी कर सकता है (अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल को यह शक्ति प्राप्त है)।

Q4. राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति (Pardoning Power) किस अनुच्छेद में वर्णित है?

  • (A) अनुच्छेद 60
  • (B) अनुच्छेद 61
  • (C) अनुच्छेद 72
  • (D) अनुच्छेद 108

उत्तर: (C)

व्याख्या: संविधान का अनुच्छेद 72 राष्ट्रपति को क्षमा, दंडविराम, लघूकरण आदि की शक्ति प्रदान करता है।

Q5. राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश संसद का सत्र शुरू होने के बाद कितने समय के भीतर पारित होना आवश्यक है?

  • (A) 14 दिन
  • (B) 1 महीना
  • (C) 6 सप्ताह
  • (D) 6 महीने

उत्तर: (C)

व्याख्या: अध्यादेश संसद का पुनः सत्र शुरू होने की तिथि से 6 सप्ताह के भीतर अनुमोदित होना अनिवार्य है, अन्यथा यह निष्प्रभावी हो जाता है।

Q1. राष्ट्रपति के चुनाव में मतों के मूल्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. प्रत्येक राज्य के विधायक के मत का मूल्य समान होता है।
  2. 1971 की जनगणना के आधार पर जनसंख्या का निर्धारण किया जाता है।
  3. संसद के सभी सदस्यों के मतों का मूल्य समान होता है।उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सत्य है/हैं?
  • (A) केवल 1
  • (B) केवल 2 और 3
  • (C) केवल 1 और 3
  • (D) 1, 2 और 3

उत्तर: (B)

व्याख्या: कथन 1 गलत है क्योंकि प्रत्येक राज्य की जनसंख्या और विधानसभा सीटों के आधार पर विधायकों के मत का मूल्य अलग-अलग होता है (जैसे UP के विधायक का मत मूल्य सबसे अधिक है)। कथन 2 और 3 सही हैं।

Q2. राष्ट्रपति पर महाभियोग प्रक्रिया के संबंध में कौन सा कथन असत्य है?

  • (A) यह संसद के किसी भी सदन में शुरू की जा सकती है।
  • (B) संकल्प प्रस्ताव पर सदन के कम से कम 1/4 सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए।
  • (C) राष्ट्रपति को 14 दिन की पूर्व लिखित सूचना दी जानी अनिवार्य है।
  • (D) इसमें राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भी मतदान करते हैं।

उत्तर: (D)

व्याख्या: महाभियोग प्रक्रिया में केवल संसद के दोनों सदनों के सदस्य (निर्वाचित व मनोनीत) भाग लेते हैं; राज्य विधानसभाओं के सदस्य इसमें शामिल नहीं होते।

Q3. ‘वीटो शक्ति’ के संदर्भ में कौन सा युग्म सही सुमेलित है?

  • (A) पॉकेट वीटो – विधेयक को संसद के पास पुनर्विचार के लिए वापस भेजना
  • (B) निलंबनकारी वीटो – विधेयक पर कोई निर्णय न लेकर अनिश्चित काल के लिए रोकना
  • (C) अत्यांतिक वीटो – विधेयक पर अपनी स्वीकृति सुरक्षित रखना (मना करना)
  • (D) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (C)

व्याख्या: अत्यांतिक वीटो (Absolute Veto) में राष्ट्रपति विधेयक को अपनी स्वीकृति नहीं देता है। पॉकेट वीटो में अनिश्चित काल के लिए रोकते हैं और निलंबनकारी वीटो में पुनर्विचार के लिए भेजते हैं।

Q4. राष्ट्रपति पद की रिक्ति के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा क्रम सही है यदि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों का पद खाली हो जाए?

  • (A) प्रधानमंत्री → लोकसभा अध्यक्ष → CJI
  • (B) भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) → SC के वरिष्ठतम न्यायाधीश → लोकसभा अध्यक्ष
  • (C) भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) → सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश
  • (D) गृह मंत्री → प्रधानमंत्री → CJI

उत्तर: (C)

व्याख्या: राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों के पद रिक्त होने पर भारत का मुख्य न्यायाधीश (CJI) और उनकी अनुपस्थिति में सर्वोच्च न्यायालय का वरिष्ठतम न्यायाधीश कार्यवाहक राष्ट्रपति बनता है।

Q5. राष्ट्रपति के क्षमादान अधिकार के अंतर्गत ‘लघूकरण’ (Commutation) का क्या अर्थ है?

  • (A) सजा की प्रकृति बदले बिना उसकी अवधि कम करना
  • (B) दंड के स्वरूप को बदलकर कम कड़ा करना
  • (C) किसी विशेष परिस्थिति में सजा को पूरी तरह समाप्त कर देना
  • (D) सजा के निष्पादन पर अस्थायी रोक लगाना

उत्तर: (B)

व्याख्या: ‘लघूकरण’ का अर्थ है दंड के चरित्र/स्वरूप को बदलना (जैसे मृत्युदंड को आजीवन कारावास या कठोर कारावास में बदलना)।

Q1: क्या भारत का राष्ट्रपति अपनी इच्छा से संसद द्वारा पारित किसी विधेयक को पूरी तरह रद्द कर सकता है?

उत्तर: सामान्य साधारण विधेयकों के मामले में राष्ट्रपति निलंबनकारी वीटो का प्रयोग कर विधेयक को पुनर्विचार के लिए भेज सकता है। लेकिन यदि संसद उस विधेयक को पुनः बिना किसी संशोधन या संशोधन के साथ पारित कर देती है, तो राष्ट्रपति को उस पर अपनी स्वीकृति देनी ही पड़ती है।

Q2: क्या राष्ट्रपति के चुनाव को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है?

उत्तर: हां, अनुच्छेद 71 के अनुसार राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव से जुड़े सभी विवादों और संशयों की जांच और निर्णय केवल सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) द्वारा ही किया जाता है, और उसका निर्णय अंतिम होता है।

Q3: क्या राष्ट्रपति शासन (Article 356) लगाने की राष्ट्रपति की शक्ति असीमित है?

उत्तर: नहीं, एस.आर. बोम्मई केस (1994) के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति शासन का निर्णय न्यायिक समीक्षा के अधीन है। यदि यह सिद्ध हो जाए कि राष्ट्रपति शासन राजनीतिक दुर्भावना से लगाया गया है, तो अदालत विधानसभा को पुनः बहाल कर सकती है।

Q4: धन विधेयक (Money Bill) पर राष्ट्रपति पुनर्विचार (Suspensive Veto) की शक्ति का प्रयोग क्यों नहीं कर सकता?

उत्तर: धन विधेयक को लोकसभा में राष्ट्रपति की पूर्व सहमति (Prior Permission) से ही प्रस्तुत किया जाता है। इसलिए राष्ट्रपति सामान्यतः इसे पुनर्विचार के लिए वापस नहीं भेजता और अपनी सहमति दे देता है।

Q5: भारत में कार्यवाहक राष्ट्रपति (Acting President) अधिकतम कितने समय तक पद पर रह सकता है?

उत्तर: कार्यवाहक राष्ट्रपति अधिकतम 6 महीने तक ही पद पर रह सकता है, क्योंकि अनुच्छेद 62(2) के अनुसार राष्ट्रपति का पद रिक्त होने पर 6 महीने के भीतर नया चुनाव कराना अनिवार्य है।

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